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श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने मोदी जी की गलतयों पर प्रकाश डालते हुए उनको

सद्गुरुदेव योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने मोदी जी की गलतयों पर प्रकाश डालते हुए उनको १०० नंबर में मात्र १० ही दिए, जानिये क्यों? साथ ही उन्होंने प्रधानसेवक मोदी जी की गलतियों पर गहराई से प्रकाश डालते हुए कहा कि वह मोदी जी की गलतियों को हमेशा उजागर करते रहेंगे आज समाज के पास अन्य विकल्प नहीं है लेकिन मोदी जी गरीबों कि अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरते ।
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गुर्दे या पित्त की पथरी

इस पृथ्वी में मानव को माता भगवती की अनुपम कृति कहा गया है, हमारे देवता जिनका निवास स्वर्ग बताया जाता है, अगर उन्हें भी आगे की आध्यात्मिक यात्रा तय करनी होती है तो उन्हें भी मनुष्य जीवन धारण कर तपस्या करनी पड़ती है। इन सब बातों से मनुष्य शरीर का महत्व समझा जा सकता है। परन्तु फिर भी हम अपने जीभ के स्वाद के वशीभूत तरह-तरह के खाद्यान्य जो इस शरीर के लिये हानिकारक है खाते रहते हैं। और जब शरीर बीमार हो जाता है तो डाक्टर की शरण में जाते हैं। परन्तु सभी रोगों का इलाज एलोपैथिक पद्धति में नहीं है। उन्ही में एक महारोग गुर्दे, पित्राशय की पथरी है। जिन्हें डाक्टर आपरेशन से निकाल देते हैं। परन्तु आयुर्वेद के माध्यम से इन्हे गलाया जा सकता है। इसी प्रकार का एक नुख्सा मैने कल्याण विशेषांक के आरोग्य अंक में पढ़ा था, पाठकों के लाभार्थ यहां प्रकाशित कर रहा हूँ आशा है इससे आप लाभ उठायेंगे नुख्सा निम्न है। नारियल के फूल 21, काली मिर्च 7 नग के साथ पानी में पीसकर 10 महीने पिलाने से पथरी गल कर निकल जाती है। कुछ दवायें पूर्ण फलप्रद है उनसे पथरी गल जाती है परन्तु यहां लिखी नहीं जा सकती है। क्योंकि दवा सही पहिचान क…

घृत कुमारी (एलोवीरा)

जो मानव षरीर को निरोगी रखने में पूर्ण सहायक है।
अधिकांश रोगों की जड़ मानव का आमासय हैं जहाँ कुछ भी खाये हुये को पाचन क्रिया के माध्यम से निर्मित रस को बड़ी आंत द्वारा अवषोशित कर वह रस खून में मिलकर सारे शरीर के अंगों को ताकत देता है। और अगर मानव का पेट (अमाशय) खराब हो जाये या सही ढंग से काम न करे, खाना को पचाना कम कर दे, पेट में गैस बनने लगे, कब्ज रहे, पेट पूरी तरह से साफ न हो तो आप समझ सकते हैं कि उस परिस्थित में दूषित रस बड़ी आंत द्वारा अवषोशित कर खून में मिलाया जाता है और खून भी दूषित हो जाता है एवम सारे शरीर के अंगों को धीरे-धीरे खराब करता जाता है जिससे अनेकों तरह की बीमांरियां आने लगती हैं। और व्यक्ति परेशान रहने लगता है। उसके सामने बढ़िया-बढ़िया व्यंजन रख दें तो भी वह उन्हे खा नहीं सकता। चाहे उसके पास जितनी सम्पदा क्यों न हो परन्तु वह चैन से नहीं रह सकता इन सब परिस्थितियों से निपटने के लिये आयुर्वेद ने हमें पूरा सहयोग किया है घृतकुमारी (ग्वारपाठा) के रूप में एक औषधि प्रदान की है जिसे घृतकुमारी कहते हैं। घृतकुमारी का पौधा 2 फुट तक ऊंचा तथा पूरे भारतवर्ष में पैदा होता है। इसके पूरे पेंड़…

सफेद मूसली (जो व्यक्ति की यौवन शक्ति को बरकरार रखती है)

सफेद मूसली  जो व्यक्ति की यौवन शक्ति को बरकरार रखती है
अगर व्यक्ति में कान्ति, ओज, सुन्दरता और शक्ति लम्बे समय तक बरकरार रहे तो उस व्यक्ति से सभी प्रभावित होते हैं। और ऐसे व्यक्ति को अपना दोस्त, हमसफर बनाना ज्यादा पसन्द करते हैं। अगर व्यक्ति मांसाहार, ऐलोपैथिक विटामिन्स, कृतिम मेकप को छोड़कर आयुर्वेद की शरण में आ जाये तो वह स्वाभाविक रूप से पूर्ण स्वस्थ्य, सुन्दर और रोग रहित हो सकता है। आयुर्वेद में अनेकों ऐसी दिव्य औषधियां हें। जो शरीर को स्वस्थ सुन्दर और निरोगी बनाती हें। सफेद मूसली ऐसी ही एक दिव्य जड़ी है। जो मानव की वीर्य से सम्बन्धित बीमारियों को दूर करने में बेजोड़ है। यह शीघ्रपतन को दूर करती है। आयुर्वेद के अन्दर जितनी भी वीर्यवर्द्धक, कामोद्वीपक तथा बाजीकारक पाक और चूर्ण बनते हें उनमें सफेद मूसली मुख्य रूप से पड़ती है। जो मानव शरीर में स्थित सबसे ज्यादा कीमती मज्जा (वीर्य) को शोधित व पुष्ट करती है, जिससे व्यक्ति के अन्दर ओज की वृद्धि होती है और मनुष्य स्वस्थ, सुन्दर और बलशाली बनता है तथा उसके अन्दर रोगों से लड़ने की शक्ति बढ़ती है साथ ही यह औषधि मनुष्य की कामशक्ति को स्थिर रखने और उसक…

‘‘बसंत’’ ऋतुओं का राजा

ऋतुओं का राजा ‘‘बसन्त''
ऐसी ऋतु जिसमें न सर्दी की अधिकता हो न ही गर्मी की तपिस, उस ऋतु को हम बसन्त ऋतु कहते हैं। इस ऋतु में समशीतल मंद सुगंन्धित पवन बहने लगती है। आमों के पेड़ो में बौर आ जाती है। पेड़ो के पुराने पत्ते झड़ कर नवीन पत्ते, पुष्प तथा रस भरे फल आने लगते हैं। मानव मन प्रसन्नचित होने लगता है। परन्तु इस ऋतु चक्र के परिवर्तन के समय मानव को अपने खान-पान में थोड़ा बदलाव करने की जरुरत होती है। क्योंकि प्रत्येक ऋतु की अपनी एक विशेषता होती है और उसी के अनुसार हमें अपने खान-पान में परिवर्तन करना चाहिये जिससे हमारा शरीर लम्बे समय तक स्वस्थ और निरोगी रह सके।  आयुर्वेद के अनुसार हमारा शरीर तीन तत्वों (वात, पित्त, कफ) के सामान्जस्य से स्वस्थ व निरोगी रहता है और जब इन तत्वों के सामन्जस्य के बीच असंन्तुलन आता है तभी हमारे शरीर में अनेकों तरह के रोगों का आक्रमण होता है।  इन ऋतुओं के सन्धिकाल अर्थात एक ऋतु की विदाई तथा दूसरी ऋतु के आगमन के बीच के समय को सन्धिकाल के रुप में मानते हैं और इस ऋतु परिवर्तन के चक्र के बीच में शरीर में स्थित वात, पित्त, कफ में भी कुछ परिवर्तन आता है। जब शिशिर ऋतु…

दिव्य गुणों वाली ब्राम्हीं

दिव्य गुणोवाली ‘‘ब्राम्ही’’ महोषधि  जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
हमारा आयुर्वेद कहता है कि अगर किसी व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढा दी जाये तो उसमें रोगों से लडने की क्षमता आ जाती है। और अगर व्यक्ति रोगों से बच जाये तो उसकी उम्र बढ़ जाती है। दीर्घायु हो जाता है। हमारे भारत देश में अनेकों दिव्य गुण सम्पन्न औषधियां हैं। जिनमें एक नाम ब्राम्ही बूटी का है। वैसे तो इस ब्राम्ही बूटी को सभी लोग बुद्धिवर्धक, स्मरणशक्ति को बढाने वाली मानते हें। परन्तु इसका सबसे बड़ा गुण आयुवर्धक है क्योंकि यह व्यक्ति में रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।  अगर किसी व्यक्ति में रोगों से लडने की क्षमता आ जाये तो व्यक्ति अनेक रोगों से बच जाता है और व्यक्ति ज्याद समय तक स्वस्थ रहता है जिससे व्यक्ति की आयु में वृद्धि होती है। ब्राम्ही एक छुप जाति की वनस्पति है जो हरिद्वार से लेकर बद्रीनारायण धाम के मार्ग पर बहुतायतता से प्राप्त होती है। ब्राम्ही के गुणों से मिलती जुलती एक वनस्पति मण्डूकपर्णी भी है इसकी वजह से ब्राम्ही की पहिचान में परेशानी आती है। परन्तु अगर सही ढंग से (बारीक निगाह से) देखा जाता है। तो असली ब…

निरोगी जीवन कैसे जियें ?

हमारे आयुर्वेदिक ग्रंथों के रचयिता ऋषियों ने प्रत्येक मनुष्य को 100 वर्ष तक निरोगी जीवन जीने की कला का ज्ञान दिया था। परन्तु आज हमारा बच्चा जन्म लेते ही अनेकों बीमारियों से ग्रसित जन्म लेता है। साथ ही जन्म के कुछ सालों के अन्दर बच्चों की आंखों में चश्मा लग जाना, डायबिटीज, हार्ट में छेद, अपंगता, मानसिक विकलांगता, आदि अनेकों खतरनाक बीमारियाँ पकड़ लेती हैं। जिससे बच्चा जीवनपर्यन्त मुक्त नहीं हो पाता है। क्योंकि आज हमारा खान-पान अव्यवस्थित है। आज हमें जो दालें, सब्जियाँ, अनाज खाने को मिल रहा हैं, वह ज्यादातर कीटनाशकों के प्रभाव से प्रभावित है। सब्जियाँ तो विशेषकर कीटनाशक रसायनों से ओत प्रोत है। जो शरीर के लिए अत्यन्त घातक हैं। मच्छरों से बचने के लिए हम जहरीली दवाओं जैसे आल-आउट, गुडनाइट आदि अनेकों जहरीले रसायनों को रात में कमरे में लगाकर मच्छरों को भगाते है। इन जहरीले रसायनों का धुंआ अगर मच्छरों को मार सकता हैं। तो धीरे-धीरे हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी प्रभावित करता है। इसलिए जहां तक हो सके हमें इन रसायनों से बचना है। मच्छरदानी का उपयोग करें, खाने में साबुत दालों, चोकर युक्त मो…

कहीं आप भी मोटापा बढ़ने से परेशान तो नही

शरीर का वजन (मोटापा) बढ़ना जितना शरीर को कुरूप बनाता है। उससे कहीं ज्यादा अनेकों बीमारियों को निमंत्रण देता है। जिससे शरीर, मन मस्तिष्क परेशान रहता है। सोसायटी, पार्टी आदि में यार दोस्तों के बीच हंसी का पात्र बनता है। रोजमर्रा के कार्य प्रभावित होते हैं, चलने फिरने में परेशानी होती है। अनेकों बीमारियां जैसे-हृदय, उच्च रक्त चाप, दिल घबराना, अपने अन्दर हीन भावना पैदा होना आदि अनेकों परेशानियां पैदा होती हैं। यह सब परेशानियों की जड़ बचपन से शुरू होती हैं। बचपन में पता ही नहीं होता है कि क्या खायें, कितना खांये ? मोटापा बचपन में मां बाप के प्यार का परिणाम भी होता है। सभी मां-बाप चाहते हैं कि हमारा बच्चा हष्ट-पुष्ट स्वस्थ शरीर का हो इसी कारण बच्चे को ज्यादा से ज्यादा दूध, घी, मक्खन, मिठाई, केला, पराठे, पूड़ी, समोसा, भजिया, पकौड़ा आदि फैटी खाना खिलाते एवं खुद खाते हैं। इस कारण से भी बच्चे का वजन बढ़ता है और कुछ समय में ही बच्चा मोटा दिखने लगता है। दूसरी बात भूख से अधिक चर्बी और वसायुक्त खाना खाना ही मोटापा का सबसे बड़ा कारण है। परन्तु मां-बाप जब तक समझते हैं तब तक बात बिगड़ चुकी होती है बच्चा मोटा …

क्या सभी गिल्टियां कैंसर की होती हैं....?

हमारे शरीर के सभी अंगो में होने वाली विभिन्न आकार की गिल्टियां (गांठे) कैंसर की गांठे नहीं होती है। इनमें से बहुत ही कम गांठे कैंसर बनती हैं। जरूरी नही की कैंसर की गांठ तेजी से बढ़े या इसमें शुरू से ही दर्द हो, कुछ समय बाद पता चलता है कि दर्द हो रहा है जैसे स्तन में बनने वाली गांठंे शुरू में किसी तरह की तकलीफ नहीं देती है, परन्तु कैंसर की गांठ अन्दर ही अन्दर शरीर में फैलती रहती है। जिससे धीरे-धीरे शरीर के सभी हिस्से प्रभावित हो जाते है और त्वचा गल जाती है तथा गांठ फूट कर बहने लगती है। इसी तरह कुछ गांठे जो मांस की गहराई में बनती हैं वे भी देर से पता लगती हैं। बहुत गांठे शरीर के विभिन्न अंगों में होती हैं, वे सभी खतरनाक नहीं होती हैं। कुछ गांठे इंफेक्शन की वजह से होती हैं। जो बनते समय से ही दर्द करती हैं। जिससे बुखार भी आ जाता है और न ध्यान देने की स्थिति में त्वचा गलकर बाहर मवाद बहने लगता है। इनका इलाज शुरू में संभव है दवाओं के माध्यम से या आपरेशन से। कुछ गांठे टी. वी. की होती है जो गले, कांख, जांघों के ऊपरी हिस्से तथा पेट में हो जाती हैं, इनमें पहले दर्द नही होता परन्तु बाद में मवाद बन…

समस्त रोगों की जड़ कब्ज

जिस प्रकार प्रकृतिसत्ता एक होने पर भी संसार में अनेकों नामों से पूजी जाती है। उसी प्रकार से रोगों का प्रमुख कारण तथा रोग एक होने के बावजूद विजातीय पदार्थो का भिन्न-भिन्न स्थानों में विभिन्न मात्राओं व अवस्थाओं में एकत्रित होना ही अलग-अलग रोगों का कारण है। जैसे -मल, कफ, चर्बी, आंव, पीप आदि अनेक विजातीय पदार्थ या विष है। शरीर के सामान्य रोगों की जड़ पेट है, यदि हम उचित भोजन उचित तरीके से और उचित मात्रा में करें और भोजन पूरी तरह से हजम हो जाये और उसका ठीक से रस, खून, मांस, मज्जा, वीर्य, हड्डी आदि बने, शेष भाग नित्य मल के रूप में निकल जाये तो फिर रोग कैसा ? पर ऐसा होता कहां है। खान-पान की अनियमितता की वजह से जब शरीर का संतुलन जो वात, पित्त, कफ के रूप में होता है। वह बिगड़ जाता है या असंतुलित हो जाता है तो खाना सही से नही पचता है। आमरस दूषित हो जाता है और यही आमरस पूरे शरीर मे जाकर पूरे शरीर को दूषित करता है जिससे शरीर में अनेको रोगों की उत्पत्ति होती है। खान-पान की अनियमितता जैसे समय से न खाना, या अधिक चटपटा, तला हुआ, मिर्च मसाले वाला, मांस भक्षण, शराब सेवन, तम्बाकू, गुटका आदि खाने से, इसलि…

समाज की ज्वलन्त समस्याए Burning Problems of the Society

                                                  प्रार्थना           जिनके सातों चक्र अर्थात् पूर्ण कुण्डलिनी शक्ति जाग्रत हैं, जिनका अवतरण ही इस कलयुग की भयावहता के बीच सतयुग की स्थापना हेतु हुआ है, जिन पर माता भगवती जगत् जननी जगदम्बा जी की इतनी कृपा है कि वे प्रत्यक्ष रूप से प्रतिदिन दर्शन देती हैं। ऐसे सद्गुरुदेव युग चेतना पुरुष परमहंस योगीराज  श्री शक्तिपुत्र जी महाराज के पावन चरण कमलों में मेरा कोटि-कोटि साष्टांग प्रणाम।
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जापान में विनाश लीला

दिनांक 11 मार्च 2011 को प्रातः 05ः46 बजे जापान में अब तक का सबसे भयंकरतम भूकम्प आया। इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 8.9 थी। इसका एपीसेन्टर प्रशांत महासागर की तली में बताया जा रहा है। इससे सागर में उग्र सुनामी उत्पन्न हुई, जिसके फलस्वरूप जापान के उत्तर-पूर्वी तट पर विनाश का ताण्डव उत्पन्न हुआ। सुनामी लहरों की ऊंचाई 20 से 30 फुट तक थी। इससे 40 लाख मकान क्षतिग्रस्त होेने के समाचार हैं। सुनामी की लहरों की तीव्रता इतनी थी कि कार, ट्रक, बसें और छोटी सम…